देश के श्रम संगठनों के आह्वान पर जनपद प्रतापगढ़ में बुधवार को आयोजित आम हड़ताल में विभिन्न मजदूर एवं कर्मचारी संगठनों की व्यापक भागीदारी






देश के श्रम संगठनों के आह्वान पर जनपद प्रतापगढ़ में बुधवार को आयोजित आम हड़ताल में विभिन्न मजदूर एवं कर्मचारी संगठनों ने व्यापक भागीदारी की। बीमा, बैंक, रेलवे, डाक विभाग, लोक निर्माण विभाग, राज्य कार्यालय सहित अनेक संस्थानों में कर्मचारी हड़ताल पर रहे। आवश्यक सेवाओं को छोड़कर लगभग सभी क्षेत्रों में हड़ताल का व्यापक प्रभाव देखने को मिला।
यह आम हड़ताल केंद्र सरकार द्वारा लागू की गई चार श्रम संहिताओं को रद्द किए जाने, बिजली संशोधन विधेयक व बीज संशोधन विधेयक को वापस लिए जाने, मनरेगा को समाप्त कर वी.बी. रामजी योजना लागू किए जाने के निर्णय को वापस लेने एवं मनरेगा बहाल करने, न्यूनतम वेतन ₹26,000 किए जाने, पुरानी पेंशन योजना बहाल करने, शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, रेलवे, कोयला, तेल, भेल सहित सभी सार्वजनिक क्षेत्र के निजीकरण पर रोक लगाने, स्कीम वर्कर्स को राज्य कर्मचारी का दर्जा देने, आउटसोर्सिंग एवं ठेका प्रथा समाप्त करने, स्थायी रोजगार का सृजन करने, नियमित प्रकृति के कार्यों पर स्थायी नियुक्तियां करने, बैंक व बीमा क्षेत्र में एफडीआई वापस लेने, ई-श्रम एवं बीओसीडब्ल्यू बोर्ड में पंजीकृत सभी श्रमिकों को आयुष्मान कार्ड जारी करने सहित विभिन्न मांगों को लेकर आहूत की गई थी।
जनपद के विभिन्न स्थानों पर कर्मचारी एवं मजदूर संगठनों द्वारा अलग-अलग प्रदर्शन किए गए। जिला मुख्यालय स्थित कलेक्ट्रेट परिसर में श्रम संगठनों द्वारा संयुक्त रूप से एक विशाल सभा का आयोजन दोपहर 12 बजे किया गया, जिसकी अध्यक्षता जिला ट्रेड यूनियन काउंसिल के अध्यक्ष हेमंत नंदन ओझा ने की।
सभा को प्रमुख रूप से डीटीयूसी के संरक्षक रामबरन सिंह, एआईटीयूसी के बेचन अली, रामसमुझ मौर्य, उत्तर प्रदेश बैंक एम्प्लाइज यूनियन के अध्यक्ष नरेंद्र प्रसाद मिश्र, राजमणि पाण्डेय (सीपीआई), रेलवे मेंस यूनियन के पूर्व मंत्री हरीराज यादव, स्वायत्त शासी कर्मचारी महासंघ के महामंत्री रोशन व अध्यक्ष मुकेश वाल्मीकि, मनरेगा संघ के अध्यक्ष अनिल कुमार यादव, उत्तर प्रदेश भवन एवं अन्य सन्निर्माण श्रमिक यूनियन के मंत्री राघवेंद्र मिश्र व अध्यक्ष आर.डी. यादव, डाक विभाग के नागेंद्र तिवारी, सुरेंद्र कुमार, माले से रामनरेश पटेल, किसान सभा के महामंत्री निर्भय प्रताप सिंह, किसान नेता विजयानंद तिवारी, राम अचल वर्मा, रविंद्र कुमार पाल, उत्तर प्रदेश बिजली कर्मचारी संघ आदि ने संबोधित किया।
वक्ताओं ने कहा कि भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार लगातार मजदूर, कर्मचारी एवं किसानों के अधिकारों पर हमला कर रही है। पुराने श्रम कानूनों को समाप्त कर चार नई श्रम संहिताएं लागू कर दी गई हैं, जिससे श्रमिकों की शक्ति कमजोर होगी और कॉरपोरेट हितों को बढ़ावा मिलेगा। यूनियन बनाने एवं हड़ताल करने के अधिकारों को सीमित कर दिया गया है। काम के घंटे 8 से बढ़ाकर 12 किए जा रहे हैं, ओवरटाइम की सीमा बढ़ाई जा रही है तथा 300 तक कर्मचारियों वाले कारखानों पर श्रम कानून लागू नहीं होंगे, जो श्रमिकों के हितों के विरुद्ध है।
सभा के अंत में जिलाधिकारी के प्रतिनिधि के रूप में तहसीलदार सदर ने पहुंचकर राष्ट्रपति को संबोधित 13 सूत्री ज्ञापन प्राप्त किया। इस अवसर पर इंकलाब जिंदाबाद, मजदूर-कर्मचारी-किसान एकता जिंदाबाद, चार श्रम संहिता रद्द करो, पुरानी पेंशन बहाल करो, आउटसोर्सिंग ठेका प्रथा समाप्त करो जैसे नारे लगाए गए।
जिला ट्रेड यूनियन काउंसिल की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में श्रमिक नेता हेमंत नंदन ओझा ने आम हड़ताल में भाग लेने वाले सभी मजदूर एवं कर्मचारी संगठनों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आने वाले दिनों में केंद्र एवं प्रदेश सरकार की मजदूर-विरोधी नीतियों के खिलाफ संघर्ष और तेज किया जाएगा।


