पार्सल डिलीवरी के नाम पर व्हाट्सऐप हैक करने वाले अंतरराज्यीय साइबर गिरोह का पर्दाफाश, तीन गिरफ्तार

प्रतापगढ़। पार्सल डिलीवरी और पता सत्यापन के नाम पर लोगों को झांसे में लेकर मोबाइल में कॉल फॉरवर्डिंग सक्रिय कराने और इसके बाद व्हाट्सऐप अकाउंट पर कब्जा कर रिश्तेदारों व परिचितों से ठगी करने वाले अंतरराज्यीय साइबर गिरोह का साइबर क्राइम पुलिस थाना प्रतापगढ़ ने खुलासा किया है। पुलिस ने गिरोह के तीन सदस्यों को गिरफ्तार किया है। इनके कब्जे से तीन मोबाइल फोन और तीन सिमकार्ड बरामद हुए हैं।
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ देश के 15 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में 80 साइबर धोखाधड़ी की शिकायतें सामने आई हैं। इन मामलों में करीब 37 लाख 79 हजार 247 रुपये की साइबर ठगी किए जाने का खुलासा हुआ है।
पार्सल के नाम पर शुरू होता था खेल
मामला 22 जून 2026 को सामने आया, जब पल्टन बाजार निवासी एक व्यक्ति ने साइबर क्राइम पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई। पीड़ित के मुताबिक, अज्ञात जालसाजों ने पार्सल डिलीवरी के नाम पर फोन किया और एक विशेष कोड डायल करने के लिए कहा। कोड डायल करते ही मोबाइल नंबर पर कॉल फॉरवर्डिंग सक्रिय हो गई।
इसके बाद आरोपियों ने कॉल आधारित सत्यापन प्रक्रिया का दुरुपयोग करते हुए पीड़ित के व्हाट्सऐप अकाउंट पर अनधिकृत नियंत्रण हासिल कर लिया। व्हाट्सऐप का नियंत्रण मिलने के बाद आरोपियों ने पीड़ित के रिश्तेदारों और परिचितों को बीमारी, दुर्घटना या अस्पताल में भर्ती होने जैसी आपात स्थिति बताकर पैसे मांगे और फर्जी बैंक खातों व क्यूआर कोड के जरिए रकम अपने खातों में मंगाई।
इंटरनेट से जुटाते थे लोगों की जानकारी
पुलिस पूछताछ में सामने आया कि गिरोह के सदस्य इंटरनेट और गूगल सर्च के जरिए संभावित पीड़ितों के नाम, पते और मोबाइल नंबर जैसी जानकारी जुटाते थे। इसके बाद फर्जी अथवा दूसरे सिमकार्ड से फोन कर खुद को कूरियर या पार्सल कंपनी का कर्मचारी बताते थे।
पार्सल पहुंचाने अथवा पता सत्यापन का बहाना बनाकर पीड़ित से कॉल फॉरवर्डिंग सक्रिय कराने वाला कोड डायल कराया जाता था। इसके बाद आने वाली कॉल अपराधियों के मोबाइल पर पहुंचने लगती थी। इसी प्रक्रिया का इस्तेमाल कर वे व्हाट्सऐप अकाउंट पर नियंत्रण हासिल करते और फिर पीड़ित के परिचितों को निशाना बनाते थे।
ठगी की रकम खाते में पहुंचने के बाद आरोपी पुलिस की कार्रवाई से पहले ही एटीएम और अन्य माध्यमों से रकम निकाल लेते थे।
15 राज्यों में 80 शिकायतों से जुड़ा नेटवर्क
समन्वय पोर्टल की जांच में आरोपियों से जुड़े साइबर ठगी के 80 मामले सामने आए। इनमें महाराष्ट्र में 22, उत्तर प्रदेश में 21, बिहार और पश्चिम बंगाल में छह-छह, दिल्ली में चार, मध्य प्रदेश, तेलंगाना और उत्तराखंड में तीन-तीन मामले शामिल हैं। इसके अलावा हरियाणा, राजस्थान, तमिलनाडु, गुजरात और झारखंड में दो-दो तथा जम्मू-कश्मीर और आंध्र प्रदेश में एक-एक शिकायत दर्ज मिली।
पुलिस के मुताबिक, इन 80 मामलों में करीब 37.79 लाख रुपये की साइबर धोखाधड़ी से आरोपियों का संबंध सामने आया है।
तीन आरोपी गिरफ्तार
साइबर क्राइम पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर अमित कुमार, लालटुश कुमार और सोनू कुमार, सभी निवासी नसरतपुर, थाना बरबीघा, जनपद शेखपुरा, बिहार को 14 अगस्त 2026 को गिरफ्तार किया।
इनके पास से OnePlus Nord CE 2, Vivo T2x 5G और Realme 12 Pro+ 5G मोबाइल फोन तथा दो एयरटेल और एक जियो सिमकार्ड बरामद किया गया।
पुलिस ने बताया कि मामले में इससे पहले 27 जुलाई 2026 को पुटुश कुमार निवासी नसरतपुर, थाना बरबीघा, शेखपुरा, बिहार को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है।
एसपी के निर्देशन में कार्रवाई
अभियुक्तों की गिरफ्तारी की कार्रवाई पुलिस अधीक्षक दीपक भूकर के निर्देशन, अपर पुलिस अधीक्षक पूर्वी आलोक कुमार के पर्यवेक्षण और क्षेत्राधिकारी नगर आशुतोष मिश्रा के नेतृत्व में साइबर क्राइम पुलिस टीम ने की। टीम में निरीक्षक दिवाकर सिंह यादव, उपनिरीक्षक नदीम खां, उपनिरीक्षक अजीत सिंह, सर्विलांस सेल तथा आरक्षी हर्षदीप और चालक आरक्षी ज्वाला सिंह शामिल रहे।
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों के विरुद्ध विधिक कार्रवाई की जा रही है। गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों, बैंक खातों, डिजिटल लेन-देन और साइबर ठगी के अन्य मामलों की भी जांच जारी है।
पुलिस की नागरिकों से अपील
पुलिस ने लोगों को सावधान करते हुए कहा है कि पार्सल डिलीवरी, बैंकिंग, केवाईसी या मोबाइल सिम से संबंधित किसी भी अनजान कॉल पर बताए गए कोड को मोबाइल से डायल न करें। साथ ही किसी अपरिचित व्यक्ति को OTP, बैंक विवरण, UPI PIN या अन्य गोपनीय जानकारी न दें। साइबर ठगी होने पर तत्काल 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं।
