
भारत के 77वें गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर, जहाँ पूरा देश अपनी आन-बान और शान का उत्सव मना रहा है, वहीं उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले के लिए एक स्वर्णिम अध्याय लिखा गया है। अपनी लेखनी से शब्दों को जीवंत करने वाले और साहित्य जगत में कई विश्व रिकॉर्ड अपने नाम करने वाले युवा साहित्यकार अर्पित सर्वेश को प्रतिष्ठित ‘राष्ट्रीय गौरव और उत्कृष्टता पुरस्कार 2026’ से सम्मानित किया गया है।
यह पुरस्कार अर्पित के उस असाधारण समर्पण, उत्कृष्टता और राष्ट्र निर्माण में उनके अमूल्य योगदान का प्रमाण है, जिसने न केवल जिले का, बल्कि पूरे प्रदेश का मान अंतर्राष्ट्रीय पटल पर बढ़ाया है।
साहित्य के आकाश में चमकता प्रतापगढ़ का सितारा
प्रतापगढ़ की माटी हमेशा से ही शूरवीरों और विद्वानों की जन्मस्थली रही है, लेकिन अर्पित सर्वेश ने अपनी विलक्षण प्रतिभा से इस परंपरा को एक नई ऊँचाई दी है। मात्र 23 वर्ष की अल्पायु में 27 से अधिक पुस्तकें और 500 से अधिक कविताएँ रचकर अर्पित ने यह सिद्ध कर दिया है कि प्रतिभा किसी उम्र की मोहताज नहीं होती। उनकी कृतियों में न केवल भावनाओं का ज्वार है, बल्कि समाज को दिशा दिखाने वाली एक प्रखर दृष्टि भी है।
पुरस्कार समिति ने अर्पित की प्रशंसा करते हुए कहा कि, “आपकी उत्कृष्ट सेवा और समर्पण की भावना राष्ट्र निर्माण के सच्चे स्वरूप को दर्शाती है। समाज के प्रति आपका योगदान और आपकी उपलब्धियां पूरे राष्ट्र के लिए गर्व का विषय हैं।”
एक लेखक नहीं, राष्ट्र निर्माता की भूमिका
अर्पित सर्वेश केवल शब्दों के जादूगर नहीं हैं, बल्कि वे अपनी रचनाओं के माध्यम से ‘विकसित भारत’ के संकल्प को भी मजबूती दे रहे हैं। उनकी प्रसिद्ध पुस्तकें जैसे ‘लाइट ऑफ डार्कनेस’ और ‘वेरिटी ऑफ इंडिया’ युवाओं के बीच बेहद लोकप्रिय हैं। उनके विश्व रिकॉर्ड यह बताते हैं कि उन्होंने अपनी लेखनी की गति और गुणवत्ता से पूरी दुनिया को अचंभित किया है।
इस सम्मान की घोषणा होते ही प्रतापगढ़ में हर्ष की लहर दौड़ गई है। स्थानीय बुद्धिजीवियों और शिक्षाविदों का मानना है कि अर्पित को मिला यह राष्ट्रीय सम्मान क्षेत्र के हज़ारों युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा। यह सम्मान इस बात का प्रतीक है कि यदि संकल्प दृढ़ हो, तो एक छोटे शहर का युवा भी अपनी मेहनत से राष्ट्रीय गौरव बन सकता है।
सफलता का सफर: संघर्ष से शिखर तक
केंद्रीय विश्वविद्यालय से अंग्रेजी साहित्य में परास्नातक की पढ़ाई कर चुके अर्पित सर्वेश ने हमेशा अपनी जड़ों को प्राथमिकता दी है। उनके लेखन में भारतीय संस्कृति, आध्यात्म और सामाजिक सरोकारों का अद्भुत संगम मिलता है। इससे पहले भी वे ‘इंटरनेशनल आइकॉन अवार्ड’ और ‘नेशनल यूथ पार्लियामेंट अवार्ड’ जैसे प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजे जा चुके हैं, लेकिन गणतंत्र दिवस के अवसर पर मिला यह ‘नेशनल प्राइड’ पुरस्कार उनके करियर की सबसे बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
गौरवशाली क्षण और भविष्य का संकल्प
सम्मान प्राप्त करने के बाद, अर्पित ने इस गौरव का श्रेय अपने माता-पिता, गुरुजनों और प्रतापगढ़ की जनता को दिया। उन्होंने कहा कि यह पुरस्कार उनके लिए केवल एक उपलब्धि नहीं, बल्कि समाज के प्रति उनकी जिम्मेदारी को और बढ़ाने वाला एक वादा है।
“मेरा लक्ष्य अपनी लेखनी के माध्यम से भारत की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक स्तर पर पुनर्स्थापित करना है। यह पुरस्कार मुझे और अधिक निष्ठा के साथ राष्ट्र सेवा करने की ऊर्जा प्रदान करता है।” — अर्पित सर्वेश
आज पूरा प्रतापगढ़ अपने इस लाडले की उपलब्धि पर गर्व महसूस कर रहा है। अर्पित सर्वेश ने यह साबित कर दिया है कि शब्दों में वह शक्ति है जो न केवल इतिहास लिख सकती है, बल्कि देश का भविष्य भी बदल सकती है।
